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मुजफ्फरनगर- जिले के ग्राम मांडला में पांच हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रस्तावित औद्योगिक पार्क की योजना भूमि विवाद के चलते अधर में लटक गई है। रुड़की की एप्रो ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक अभिलाषा सिंह ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने जमीन खरीदने के लिए करोड़ों रुपये का भुगतान किया, लेकिन इसके बावजूद भूमि की रजिस्ट्री नहीं कराई गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की, जिसके बाद उन्हें उत्तराखंड के मंगलौर थाने में 20 अक्टूबर को 17 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराना पड़ा।
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कंपनी की निदेशक ने जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर से भी मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है। मीडिया सेंटर में पत्रकारों से वार्ता करते हुए अभिलाषा सिंह ने बताया कि कंपनी ग्राम मांडला, तहसील सदर, परगना छपार, जिला मुजफ्फरनगर में बड़े स्तर पर औद्योगिक पार्क स्थापित करना चाहती थी। इस परियोजना के लिए लगभग 180 बीघा भूमि की आवश्यकता थी। उनका कहना है कि औद्योगिक पार्क स्थापित होने से क्षेत्र के करीब पांच हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना थी। इसमें कुशल और अकुशल दोनों प्रकार के श्रमिकों को काम उपलब्ध कराने की योजना थी। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ ही आसपास के लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकते थे।
अभिलाषा सिंह के अनुसार, रुड़की के कर्नल एन्क्लेव क्षेत्र निवासी जितेंद्र वर्मा ने कंपनी प्रबंधन से संपर्क कर ग्राम मांडला में बरला-बसेड़ा मुख्य मार्ग पर लगभग 130 बीघा भूमि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। कंपनी को बताया गया था कि प्रस्तावित जमीन सभी प्रकार के विवादों और भार से मुक्त है। इस आश्वासन के आधार पर तीन जुलाई 2024 को भूमि खरीदने के संबंध में अनुबंध किया गया। अनुबंध के अनुसार, भूमि का मूल्य 10.25 लाख रुपये प्रति बीघा तय किया गया था। इसके साथ ही भूमि पर सड़क के स्तर से छह इंच तक भराव कराने की शर्त भी रखी गई थी। कंपनी का आरोप है कि जितेंद्र वर्मा के अनुरोध पर उसी दिन तीन लाख रुपये टोकन राशि के रूप में दिए गए।
दूसरे अनुबंध के बाद 20 लाख रुपये और दिए
कंपनी की निदेशक ने बताया कि 27 अगस्त 2024 को जितेंद्र वर्मा दोबारा कंपनी प्रबंधन के पास पहुंचे और पहले प्रस्तावित खसरा नंबरों से अलग खसरा नंबरों की भूमि खरीदने का प्रस्ताव दिया। कंपनी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए नया अनुबंध किया। इसके बाद जितेंद्र वर्मा के बैंक खाते में आरटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से 20 लाख रुपये भेजे गए। कंपनी के अनुसार, इस तरह जितेंद्र वर्मा को कुल 23 लाख रुपये दिए गए थे, ताकि वह संबंधित भूमिधारकों को अग्रिम अथवा टोकन राशि का भुगतान कर सकें। बाद में जितेंद्र वर्मा ने मुशीर आलम निवासी ग्राम खुड्डा, थाना छपार को भूमि खरीद की प्रक्रिया में अपना सहयोगी बताया। अभिलाषा सिंह ने आरोप लगाया कि जितेंद्र वर्मा और मुशीर आलम के माध्यम से विभिन्न भूमिधारकों तथा उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में अलग-अलग तिथियों पर कुल 5 करोड़ 42 लाख रुपये स्थानांतरित किए गए। कंपनी का कहना है कि यह धनराशि प्रस्तावित भूमि खरीदने के लिए अग्रिम भुगतान के रूप में दी गई थी।
इसके अतिरिक्त, कंपनी के प्रार्थना पत्र के मुताबिक, जितेंद्र वर्मा और मुशीर आलम ने अपने नाम तथा अपने परिजनों और संबंधियों के खातों में भी धनराशि प्राप्त की। आरोप है कि इन खातों में कुल दो करोड़ 42 लाख 50 हजार रुपये इस आश्वासन पर भेजे गए कि संबंधित भूमिधारकों को भुगतान करना है और प्रस्तावित जमीन पर भराव कराने के लिए भी धन की आवश्यकता है। कंपनी की ओर से दिए गए विवरण के अनुसार, इन भुगतानों का कुल योग सात करोड़ 84 लाख 50 हजार रुपये बताया गया है। कंपनी का आरोप है कि इतनी बड़ी धनराशि दिए जाने के बावजूद जमीन की रजिस्ट्री उसके पक्ष में नहीं कराई गई। अभिलाषा सिंह का कहना है कि कंपनी ने जमीन खरीद के मामले में कथित धोखाधड़ी को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
उनका आरोप है कि शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें दूसरे राज्य में जाकर मुकदमा दर्ज कराना पड़ा। अभिलाषा सिंह के अनुसार, उत्तराखंड के मंगलौर थाने में 20 अक्टूबर 2026 को 17 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। कंपनी की निदेशक ने मामले में संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है। कंपनी की निदेशक का कहना है कि मांडला गांव में औद्योगिक पार्क स्थापित करने की योजना केवल जमीन खरीदने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके माध्यम से क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। करीब पांच हजार लोगों को रोजगार देने की योजना थी, लेकिन भूमि की रजिस्ट्री नहीं होने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। उनका आरोप है कि संबंधित लोग शुरुआत में जमीन की रजिस्ट्री कराने का आश्वासन देते रहे, लेकिन बाद में विक्रय पत्र निष्पादित करने से इनकार कर दिया। इससे कंपनी को आर्थिक नुकसान हुआ और प्रस्तावित औद्योगिक परियोजना प्रभावित हुई। अभिलाषा सिंह ने जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर को दिए प्रार्थना पत्र में मांग की है कि संबंधित भूमिधारकों को कंपनी के पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए निर्देशित किया जाए। यदि संबंधित लोग जमीन बेचने के इच्छुक नहीं हैं, तो उन्हें दी गई पूरी धनराशि वापस दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। कंपनी की निदेशक ने मामले में निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि औद्योगिक पार्क स्थापित होने से क्षेत्र के पांच हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना थी। अब कंपनी प्रशासन से न्याय की उम्मीद कर रही है।
मुज़फ्फरनगर व्यूज़ | मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
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