मुजफ्फरनगर- अनोखा प्रदर्शन, सड़क बनी तालाब तो बीच पानी में खाट बिछाकर धरने पर बैठे ग्रामीण, विकास की खुली पोल

By muzaffarnagarviews

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मुजफ्फरनगर- (सड़क बनी तालाब) जहाँ एक तरफ प्रदेश सरकार गड्ढा मुक्त सड़कों और बेहतर बुनियादी ढांचों के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं मुजफ्फरनगर के भोपा थाना क्षेत्र से आई एक तस्वीर इन दावों की कलई खोल रही है। ग्राम सिकंदरपुर-सिकरी मार्ग पिछले एक साल से ‘सड़क’ कम और ‘तालाब’ ज्यादा नजर आ रहा है। सिस्टम की इस अनदेखी से आजिज आकर ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाते हुए पानी के बीच ही खाटें बिछाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

​एक साल का दर्द, सड़क बनी नारकीय तालाब

​ग्राम सिकंदरपुर के इस मुख्य मार्ग पर पिछले करीब 12 महीनों से जलभराव की समस्या बनी हुई है। आलम यह है कि सड़क पर हर समय गंदा और बदबूदार पानी भरा रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने ग्राम पंचायत से लेकर आला अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटकर एड़ियां घिस लीं, लेकिन नतीजा ‘सिफर’ रहा। आज जब सब्र का बांध टूट गया, तो ग्रामीण, महिलाएं और बुजुर्ग अपनी खाटें उठाकर गंदे पानी के बीच ही जा बैठे।

​धार्मिक आस्था और बच्चों के भविष्य पर चोट

​धरने पर बैठी महिलाओं ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “हमें मंदिर जाने के लिए इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। पवित्र भाव से पूजा करने जाते हैं, लेकिन रास्ते में पैर और कपड़े गंदे हो जाते हैं, जिससे हमारी धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।” वहीं, दूसरी ओर बच्चों की शिक्षा भी दांव पर है। स्कूली बच्चे रोजाना इस कीचड़ भरे पानी में फिसलकर गिरते हैं, जिससे उनकी किताबें खराब हो जाती हैं और चोट लगने का डर अलग से बना रहता है।

बीमारियों का घर और हादसों का अड्डा

ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह सिर्फ सड़क की समस्या नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र अब बीमारियों का केंद्र बन चुका है। गंदे पानी में पनप रहे मच्छरों के कारण घर-घर में लोग डेंगू और मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक रोजाना यहाँ फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। बरसात के मौसम में तो स्थिति ऐसी हो जाती है कि सड़क का अस्तित्व ही खत्म हो जाता है।

​”आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए”

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनकी मांग स्पष्ट है—तत्काल जलनिकासी की व्यवस्था हो और सड़क का नवनिर्माण कराया जाए। ग्रामीणों ने दो-टूक शब्दों में कहा कि अब वे अधिकारियों के खोखले आश्वासनों में नहीं आने वाले। यदि जल्द ही मौके पर काम शुरू नहीं हुआ, तो यह आंदोलन तहसील और जिला मुख्यालय तक पहुंचेगा। फिलहाल, बीच पानी में खाट पर बैठे ग्रामीणों का यह मंजर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जो प्रशासन की सुस्ती पर एक बड़ा तंज है।

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मुज़फ्फरनगर व्यूज़ | मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

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