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मुजफ्फरनगर के तुषार का अद्भुत हुनर, रद्दी अखबारों से गढ़ी ‘संकटमोचन’ की दिव्य छवि

By प्रशांत खत्री

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मुजफ्फरनगर- कला जब भक्ति और कबाड़ से जुगाड़ के संकल्प से मिलती है, तो परिणाम विस्मित करने वाले होते हैं। जनपद मुजफ्फरनगर के उभरते युवा कलाकार तुषार ने हनुमान जयंती के पावन अवसर पर अपनी कला का एक ऐसा जादुई प्रदर्शन किया है, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध है। तुषार ने रद्दी अखबारों (वेस्ट न्यूज़पेपर) का उपयोग कर भगवान हनुमान की एक ऐसी ‘शैडो स्कल्प्चर’ (छाया मूर्ति) तैयार की है, जो रोशनी पड़ते ही दीवार पर पवनपुत्र के सजीव और दिव्य स्वरूप को उकेर देती है।

इस विलक्षण कलाकृति की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका 3×2 फुट का मजबूत फ्रेम भी लकड़ी या लोहे के बजाय पूरी तरह न्यूज़पेपर स्टिक्स से तैयार किया गया है। तुषार ने लगभग 15 दिनों की कड़ी मेहनत और धैर्य के साथ 2000 से अधिक न्यूज़पेपर स्टिक्स को जोड़कर इस फ्रेम और आकृति को आकार दिया है। जैसे ही इस स्कल्प्चर के सामने प्रकाश डाला जाता है, हनुमान जी का विग्रह इतनी स्पष्टता और सुंदरता के साथ उभरता है कि देखने वाले अपनी नजरें नहीं हटा पाते। यह कलाकृति न केवल रचनात्मकता का प्रमाण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ‘वेस्ट टू बेस्ट’ के संदेश को भी चरितार्थ करती है।

तुषार की कला यात्रा केवल यहीं तक सीमित नहीं है। इससे पहले उन्होंने करीब 8000 न्यूज़पेपर स्टिक्स का उपयोग कर भव्य राम मंदिर का एक शानदार मॉडल तैयार किया था, जिसकी चर्चा पूरे जनपद और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर खूब हुई थी। अपनी इसी अनोखी तकनीक से तुषार अब तक जगन्नाथ रथ, बद्रीनाथ धाम, केदारनाथ धाम, स्वर्ण मंदिर और जगन्नाथ मंदिर जैसे पवित्र धर्मस्थलों के जीवंत मॉडल तैयार कर चुके हैं। बेकार कागजों को कलात्मक पहचान देने का उनका यह जुनून आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुका है।

तुषार की यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि कला के प्रति जुनून और मेहनत सच्ची हो, तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती। साधारण अखबार की रद्दी से तैयार ये मॉडल और शैडो स्कल्प्चर उनकी गहरी सोच और सूक्ष्म कारीगरी का परिणाम हैं। शहर के प्रबुद्ध जनों और कला प्रेमियों ने तुषार की इस नवीनतम कृति की सराहना करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। आज मुजफ्फरनगर का यह युवा कलाकार अपनी इसी विशिष्ट शैली के कारण कला जगत में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है।

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मुज़फ्फरनगर व्यूज़ | मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

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