मुज़फ्फरनगर के छात्र ने गणतंत्र दिवस पर अख़बार की रद्दी से बनाया सुंदर इंडिया गेट

By प्रशांत खत्री

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मुजफ्फरनगर- जब देश अपना 77वाँ गणतंत्र दिवस मना रहा है, ऐसे में मुजफ्फरनगर के एक युवा कलाकार ने अपनी रचनात्मकता से राष्ट्रभक्ति का एक नया उदाहरण पेश किया है। शहर के गांधी कॉलोनी निवासी तुषार शर्मा ने बेकार पड़े पुराने अखबारों (न्यूज़पेपर स्टिक) की मदद से दिल्ली के ऐतिहासिक ‘इंडिया गेट’ का एक भव्य मॉडल तैयार किया है। 11 इंच ऊँचे इस मॉडल की बारीकी और फिनिशिंग को देखकर हर कोई दंग है।

अखबार की रद्दी और कला का संगम

मुजफ्फरनगर सदर विधानसभा क्षेत्र की गली नंबर-9, वर्मा पार्क (गांधी कॉलोनी) के रहने वाले तुषार शर्मा सनातन धर्म महाविद्यालय में एमकॉम के छात्र हैं। तुषार की कला की यात्रा लॉकडाउन के दौरान शुरू हुई थी। जब दुनिया घरों में कैद थी, तब उन्होंने रद्दी अखबारों को कचरा समझने के बजाय उन्हें कलाकृति में बदलना शुरू किया। न्यूज़पेपर स्टिक से बना यह इंडिया गेट उसी कड़ी का एक हिस्सा है, जिसे उन्होंने ऐतिहासिक संरचना के हूबहू अनुरूप बनाया है। साथ ही उन्होंने इस इंडिया गेट में लाइटों का भी समावेश किया है जिससे इस कलाकृति में सुंदरता बढ़ गई है।

इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है नाम

यह पहली बार नहीं है जब तुषार की कला ने सुर्खियां बटोरी हों। इससे पहले उन्होंने रद्दी अखबारों से ही मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम मंदिर (अयोध्या) का एक शानदार मॉडल तैयार किया था। उनके इस अद्भुत कार्य को न केवल समाचार पत्रों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया, बल्कि इसे ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में भी स्थान मिला। इसके अलावा, पिछले वर्ष उन्होंने करीब 3 किलो अखबार का उपयोग करके दो महीने की कड़ी मेहनत से भारत का राष्ट्रगान “जन-गण-मन” लिखकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया था।

पर्यावरण और राष्ट्रवाद का संदेश

तुषार शर्मा का यह प्रयास केवल कला तक सीमित नहीं है। वे अपनी कला के माध्यम से तीन बड़े संदेश देना चाहते हैं।
राष्ट्रप्रेम: ऐतिहासिक प्रतीकों को बनाकर युवाओं में देश के प्रति गर्व जगाना।
पर्यावरण संरक्षण: ‘वेस्ट टू बेस्ट’ (कचरे से कला) के माध्यम से रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देना।
भारतीय संस्कृति: अपनी जड़ों और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान प्रकट करना।

युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत

गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर तुषार द्वारा तैयार किया गया यह इंडिया गेट मॉडल सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक साधारण छात्र होने के बावजूद, सीमित संसाधनों और रद्दी सामग्री के साथ ऐसी उत्कृष्ट कृतियाँ बनाना यह साबित करता है कि प्रतिभा किसी महंगे सामान की मोहताज नहीं होती। तुषार शर्मा की यह मेहनत और उनका राष्ट्रप्रेम आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उनकी यह कलाकृति न केवल गणतंत्र दिवस की शोभा बढ़ा रही है, बल्कि मुजफ्फरनगर का नाम भी रोशन कर रही है।

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मुज़फ्फरनगर व्यूज़ | मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

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