मुज़फ्फरनगर- इंटरनेट सेफर डे, साइबर अपराधों से बचाव के अधिकारियों ने दिए विभिन्न टिप्स

By muzaffarnagarviews

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मुजफ्फरनगर- जनपद के जिला पंचायत सभागार में ‘इंटरनेट सेफर डे’ के अवसर पर एक भव्य साइबर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) गजेंद्र कुमार और पुलिस अधीक्षक अपराध (SP Crime) श्रीमती इन्दू सिद्धार्थ की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के आला अधिकारियों को बदलते दौर के साइबर खतरों से निपटने के तरीके सिखाए गए।

डिजिटल अरेस्ट- ठगी का नया तरीका…

​कार्यशाला में विशेष रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए ठगी के तरीकों पर चर्चा हुई। एसपी अपराध इन्दू सिद्धार्थ ने खुलासा किया कि अपराधी किस तरह खुद को पुलिस, सीबीआई या ईडी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए लोगों में भय पैदा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में ऐसी किसी भी ‘डिजिटल अरेस्ट’ की वैधानिक प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे किसी भी संदिग्ध स्थिति में ओटीपी या पैसा साझा न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।

SAFE AI तकनीक का सही और सुरक्षित उपयोग

कार्यक्रम में Safe AI के जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग पर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया। वक्ताओं ने बताया कि एआई तकनीक जहां प्रशासन को प्रभावी बनाती है, वहीं डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के लिए खतरा भी पैदा कर सकती है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि वे एआई टूल्स का उपयोग केवल अधिकृत और सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर ही करें ताकि प्रशासनिक डेटा की नैतिकता और गोपनीयता बनी रहे।

मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य

अपर जिलाधिकारी गजेंद्र कुमार ने कहा कि डिजिटल युग में प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी दोहरी है, उन्हें खुद भी सुरक्षित रहना है और आम जनता को भी जागरूक करना है। कार्यशाला में मजबूत पासवर्ड बनाने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लगाने और संदिग्ध लिंक से बचने के तकनीकी गुर सिखाए गए। कार्यक्रम में एसडीएम सदर, एसडीएम जानसठ, मुख्य अग्निशमन अधिकारी सहित जनपद के तमाम जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।

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मुज़फ्फरनगर व्यूज़ | मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

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