मुजफ्फरनगर- जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग (BSA) में एक बार फिर अधिकारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। बुढ़ाना के पूर्व विधायक उमेश मलिक और एक पीड़ित शिक्षिका ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। आरोप है कि एक अनुभव प्रमाण पत्र को सत्यापित करने के बदले पीड़िता को दो महीने तक दफ्तरों के चक्कर लगवाए गए और मानसिक रूप से परेशान किया गया।
पीड़िता रश्मि (निवासी ककरौली) ने अपनी बाइट में बताया कि उनका चयन सरकारी नौकरी में हो चुका है, जिसके लिए उन्हें मोरना स्थित ‘न्यू आर्य पब्लिक जूनियर हाई स्कूल’ के अपने अनुभव प्रमाण पत्र का सत्यापन (Verification) बीएसए कार्यालय से कराना था। पीड़िता का आरोप है कि पिछले 10 दिनों से वह रोज़ाना दफ्तर आ रही थीं, लेकिन बीएसए ‘अनुमोदन’ (Approval) न होने का बहाना बनाकर फाइल पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे थे। पीड़िता ने रुआंसे स्वर में कहा कि विभाग की इस लेटलतीफी के कारण उनकी मेहनत से मिली सरकारी नौकरी पर खतरा मंडराने लगा था।
उमेश मलिक की दहाड़
मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुँचे पूर्व विधायक उमेश मलिक ने बीएसए को जमकर खरी-खोटी सुनाई। मलिक ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि “बीएसए खराब मानसिकता के साथ काम कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नियमानुसार यदि विद्यालय प्रबंधक नियुक्ति की सूचना विभाग को दे देता है और एक महीने तक विभाग उस पर कोई आपत्ति नहीं करता, तो वह वैध मानी जाती है।
उमेश मलिक ने आरोप लगाया कि विधायक के दबाव के बाद बीएसए ने हस्ताक्षर तो किए, लेकिन फाइल पर जानबूझकर ऐसी ‘विवादित नोटिंग’ लिख दी जिससे भविष्य में पीड़िता को दिक्कत हो। मलिक ने इसे अधिकारी की दुर्भावनापूर्ण सोच बताते हुए कहा कि वे इस भ्रष्टाचार और हठधर्मिता की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शासन से करेंगे।
मुज़फ्फरनगर व्यूज़ | मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
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