मुज़फ्फरनगर के ऐसे बुजुर्ग जो अपने हाथों से अख़बार लिख रहे हैं। इन बुजुर्ग में पत्रकारिता के जुनून से आप भी दंग रह जाएंगे, जनता की आवाज़ को अधिकारियों तक पहुंचाने का नायाब तरीका यह बुजुर्ग अपना रहे हैं। मुज़फ्फरनगर के दिनेश कुमार अपने हाथों से अख़बार लिख रहे हैं। दिनेश कुमार नामक व्यक्ति ना केवल 23 साल इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं बल्कि अपने अंदर पत्रकारिता का अनोखा जुनून संजोए हुए हैं। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर अख़बार लिखते हुए 23 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं।
आज के डिजिटल दौर में जहाँ खबरें एक क्लिक पर मोबाइल पर उपलब्ध हो जाती हैं, मुजफ्फरनगर में एक ऐसा शख्स भी है जो पिछले 23 सालों से पत्रकारिता के पुराने और सच्चे जुनून को जीवित रखे हुए है। गांधी कॉलोनी (गोलोक धाम) के निवासी 53 वर्षीय दिनेश कुमार कचहरी परिसर में एक मिसाल बन चुके हैं। दिनेश एक पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
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दिनेश कुमार का काम किसी अजूबे से कम नहीं है। जहाँ बड़े-बड़े न्यूज़ हाउस प्रिंटिंग मशीन और डिजिटल मीडिया का सहारा लेते हैं, वहीं दिनेश आज भी पेन और कागज के जरिए अपना अखबार तैयार करते हैं। दिनेश अपने हाथों से हस्तलिखित अखबार तैयार करते हैं। वे हर खबर को अपने हाथों से सुंदर लिखावट में दर्ज करते हैं। डीएम दफ़्तर के बाहर ही ज़मीन पर बैठकर अख़बार लिखकर इतिहास के पन्नों में दर्ज हो रहे हैं।
सरकारी दफ्तरों तक पहुँच
हैरानी की बात यह है कि हाथों से तैयार इस ‘हस्तलिखित’ अखबार की धमक सरकारी गलियारों तक है। दिनेश खुद पैदल व साइकिल पर चलकर विभिन्न विभागों और दफ्तरों में अपना यह अखबार पहुँचाते हैं। पिछले दो दशकों से अधिक समय से उनकी यह दिनचर्या बिना रुके जारी है। यहाँ तक कि शहर के चर्चित व प्रसिद्ध प्रतिष्ठानों पर भी अख़बार चस्पा किया करते हैं।
दिनेश से हमारी ख़ास बातचीत
दिनेश कुमार में पत्रकारिता के जुनून को देखकर जब हमने उनसे बातचीत कि तो उनके जीवन के काफ़ी तथ्य सामने आये, डिजिटल और अत्याधुनिक युग में भी साइकिल पर सवार 53 वर्षीय बुजुर्ग अभी तक कुंआरे हैं और परिवार भी उनके इस काम से ख़ुश नहीं है लेकिन ये व्यक्ति बिना रुके और बिना थके अपने जुनून को अंजाम देने में लगा है।
दिनेश की जीविका का सहारा
दिनेश वैसे तो पंजबी समाज से आते हैं और वह गाँधी कॉलोनी निवासी हैं लेकिन अपनी आजीविका साइकिल पर टॉफियां व चॉकलेट बेचकर चलाते हैं। उन्होंने कहा, मैं मौसम के हिसाब से कारोबार करता हूँ गर्मियों में आइसक्रीम बेचकर अपनी आजीविका चलाता हूँ। यह व्यक्ति साइकिल पर पचेन्डा रोड़ पर फेरी करके सामान बेचता हूँ।
अखबारों की खबरों पर रिसर्च
दिनेश कुमार ने बताया कि वह अपने हस्तलिखित अख़बार में खबरों का चयन बड़े प्रिंटिंड अखबारों की खबरों पर रिसर्च करता हूँ उसका क्या समाधान हो सकता है वो मैं अपने अखबार में लिखता हूँ और सामाजिक गतिविधियों पर भी मेरा ध्यान रहता है। उन्होंने कहा, चाहे जितना डिजिटल युग आ जाये मगर पाठक को जो संतुष्टि पढ़ने में आती है वो और कहीं नहीं मिल सकती। रोजगार भले ही किसी दिन छुट जाए मगर अख़बार जरूर लिखता हूँ क्योंकि अख़बार को नियमित लिखना जरूरी है।
दिनेश कुमार के इस जज़्बे को मुज़फ्फरनगर व्यूज परिवार नमन करता है। पत्रकारिता के लिए ऐसा जुनून शायद ही आजकल देखने को मिलता हो। सच्ची पत्रकारिता ही वो है जो समाज में बदलाव ला सके।
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मुज़फ्फरनगर व्यूज़ | मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
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