मुजफ्फरनगर- वाल्मीकि समाज का पलायन और शोषण रोकने की उठी मांग; ‘पॉलिटिकल जस्टिस पार्टी’ ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

By प्रशांत खत्री

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मुजफ्फरनगर- पोलिटिकल जस्टिस पार्टी के द्वारा बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कचहरी पहुंच कर सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय पर ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से प्रदेश में रोजगार ना मिलने के कारण समाज के लोगों का बड़े शहरों में पलायन का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा जिन गांवों में क़रीब 100 परिवार रहा करते थे वहाँ संख्या घटकर मात्र 4-5 रह गई है।

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों, विशेषकर मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली से वाल्मीकि समाज का बड़े स्तर पर पलायन एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। पॉलिटिकल जस्टिस पार्टी ने इस मुद्दे पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत मांग पत्र भेजा है। पार्टी का आरोप है कि सरकारी विभागों में हजारों पद खाली होने के बावजूद समाज के युवाओं को स्थाई रोजगार नहीं मिल रहा है, जिसके कारण वे चंडीगढ़ और लुधियाना जैसे शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।

ज्ञापन में अवगत कराया गया है कि जिन गाँवों में कभी वाल्मीकि समाज के 100 से 150 परिवार हुआ करते थे, वहां आज मात्र 4 से 5 घर ही बचे हैं। लाखों की तादाद में लोग रोजगार की तलाश में उत्तर प्रदेश छोड़कर पंजाब और हरियाणा के बड़े शहरों में जा बसे हैं। समाज का कहना है कि यदि प्रदेश में ही उचित मानदेय और स्थाई नौकरी मिले, तो इस पलायन को रोका जा सकता है।

पार्टी ने दावा किया है कि रोडवेज, तहसील, डी.एम. कार्यालय, सिंचाई विभाग, बिजली विभाग, गन्ना विभाग और समस्त सरकारी स्कूलों व कॉलेजों में सफाई कर्मचारियों के हजारों पद रिक्त पड़े हैं। इन पदों पर या तो ठेकेदारी प्रथा के तहत काम लिया जा रहा है या फिर संविदा कर्मियों से बेहद कम वेतन (9500 से 22000 रुपये) में काम कराया जा रहा है, जिससे इस कमरतोड़ महंगाई में घर चलाना नामुमकिन है।

आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि मुजफ्फरनगर नगर पालिका में मानक अनुसार लगभग 3500 सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता है। लेकिन वर्तमान में स्थाई, संविदा और ठेकेदारी मिलाकर क़रीब 970 कर्मचारियों से ही पूरा काम लिया जा रहा है। यह न केवल कर्मचारियों का आर्थिक शोषण है, बल्कि उन पर काम का मानसिक दबाव भी बढ़ा रहा है।

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मुज़फ्फरनगर व्यूज़ | मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

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