मुज़फ्फरनगर- पिछले काफ़ी दिनों से जनपद में वायु प्रदूषण बढ़ता दिख रहा है, AQI भी काफ़ी गंभीर स्थिति में बना हुआ है हालांकि उसमें उतार चढ़ाव भी जारी है, कुछ दिन पूर्व तो मुज़फ्फरनगर का AQI 400 के पास पहुँच गया था जिसको लेकर यूपी सरकार में राज्यमंत्री व नगर विधायक कपिल देव भी चिंतित दिखाई दिए और उन्होंने प्रदूषण विभाग के अधिकारियों से बातचीत भी की थी।
हालांकि दिल्ली एनसीआर के लगभग सभी जनपदों में वायु प्रदूषण काफ़ी बढ़ता दिख रहा है जिससे सांस लेने में परेशानी, खांसी व आंखों में जलन आदि अनेक प्रकार समस्याएं भी क्षेत्र में बनी हुई है। बात मुज़फ्फरनगर की करें तो यहाँ भी काफ़ी समय से किसान संगठनों के रूप में धरना प्रदर्शन कर दिल्ली से लाये जा रहे आरडीएफ को यहाँ जलाए जाने का विरोध भी लगातार जारी है।
आज इसी क्रम में इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, फेडरेशन पेपर मिल एसोसिएशन व लघु उद्योग भारती ने सयुंक रूप से प्रेसवार्ता कर अपना पक्ष रखा तथा आरडीएफ से प्रदूषण ना फैलने का तर्क भी मीडिया के समक्ष पेश किया गया।
उद्योगपतियों ने आज फेडरेशन भवन, मेरठ रोड पर एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जिसमें उन्होंने उद्योगों द्वारा आरडीएफ के इस्तेमाल से होने वाले प्रदूषण को लेकर चल रही चर्चाओं एवं उद्योगों से संबंधित तथ्यों को रखा।
प्रेस वार्ता आरंभ करते हुए पेपर मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने कहा कि मुजफ्फरनगर में उद्योगों को प्रदूषण का मुख्य कारण बताकर जो भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, वे वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उद्योगों से निकलने वाला उत्सर्जन निर्धारित मानकों के अनुरूप होता है तथा उसका निस्तारण वैज्ञानिक और नियंत्रित तरीके से किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्योगों में उपयोग होने वाले ईंधन एवं अपशिष्ट को जलाने की प्रक्रिया से किसी प्रकार का अतिरिक्त या हानिकारक प्रदूषण उत्पन्न नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि हर उद्योग में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगा है जिसका डेटा 24 घंटे यूपी पॉल्यूशन बोर्ड और सीपीसीबी पर जाता रहता है। जब फैक्टरियाँ बंद होती है तब भी एक्यूआई कम नहीं होता।
मुजफ्फरनगर से ज़्यादा एक्यूआई मेरठ, गाजियाबाद, दिल्ली, गुरुग्राम में रहता है। बिजनौर जहाँ आरडीएफ इस्तेमाल नहीं होता वहाँ भी एक्यूआई बढ़ा हुआ है। एक्यूआई सर्दियों में हवा हल्की चलने से बढ़ता है। सर्दियो में हवा भारी होती है और नीचे की हवा ऊपर नहीं जाती।
आरडीएफ का इस्तेमाल स्वच्छ भारत अभियान के तहत किया जा रहा है। दिल्ली में आरडीएफ आधारित कई बायलर है और 3 और लगने जा रहे है। सरकार इसे प्राथमिकता दे रही है। ये पर्यावरण अनुकूल है।
भारत में कोयले की कमी होने की वजह से करोड़ो टन कोयला इंपोर्ट किया जाता है जिससे बहुमूल्य USD खर्च होता है। आरडीएफ इस्तेमाल करने से कूड़े के ढेर भी समाप्त होते है।आरडीएफ विश्व में काफ़ी देशों में बिजली उत्पादन के लिए जलाया जाता है। जिससे हवा की क्वालिटी निर्धारित मानको के अनुरूप होती है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईआईए डिविजनल सेक्रेटरी पवन कुमार गोयल, स्किल डेवलपमेंट के अध्यक्ष अश्विनी खंडेलवाल, पूर्व अध्यक्ष अशोक अग्रवाल, विपुल भटनागर, नवीन अग्रवाल, लघु उद्योग भारती के क्षेत्रीय अध्यक्ष राजेश जैन, फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष अंकित संगल, मनीष भाटिया, अमित गर्ग, श्रवण गर्ग, मयंक बिंदल, सचिन बिंदल, परशून अग्रवाल, अजय कपूर, अमित मित्तल, अंकुर गर्ग, साकार गुप्ता, शशांक जैन, करण स्वरूप, अजय पालीवाल, अनमोल अग्रवाल, मृदुल भाटिया, दीपक बंसल आदि उपस्थित रहे।














