मुज़फ्फरनगर- भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर गहरी चिंता जताई है। मोर्चा ने इस समझौते से भारतीय किसानों को होने वाले संभावित नुकसान के संबंध में महामहिम राष्ट्रपति को पांच मांगों एक ज्ञापन भेजा है। भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम ने कहा यदि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में किसानों के हितों की अनदेखी की गई, तो इसका सीधा असर देश की कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह आलम के नेतृत्व में दिए गए इस ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि भारत की कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक रीढ़ है। राष्ट्रीय अध्यक्ष शाह आलम ने बताया कि जो माल भारत से अमेरिका जाएगा उस पर 18 परसेंट टेरिफ़ है और जो अमेरिका से भारत आएगा उस पर 0% टैक्स है जिसकी वजह से भारत के किसानों को आर्थिक नुकसान होगा और पहले ही लगातार किसानों के द्वारा आत्महत्या करने के मामले सामने आ रहे हैं यदि यह समझौता लागू हो तो देश का किसान आत्महत्या करने कों मज़बूर होगा। इसलिए मोर्चा नें प्रमुख मांगें करते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की है।

- कृषि उत्पाद जैसे बादाम, मक्का, सोयाबीन, कपास आदि क्षेत्र को भविष्य के सभी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों से स्थायी रूप से बाहर रखने की संवैधानिक गारंटी सुनिश्चित की जाए।
- डेरी उत्पाद जैसे चीज़, मिल्क पाउडर और प्रोटीन आदि अमेरिका भारत में निर्यात चाहता है और अमेरिका में डेरी उत्पाद पर भारी सब्सिडी प्रदान की जाती हैं। यदि ये उत्पाद भारतीय बाजार में आते हैं तो भारतीय किसानो को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा।
- किसी भी कृषि संबंधी व्यापार समझौते को लागू करने से पूर्व किसान संगठनों की सहमति अनिवार्य की जाए।
- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा प्रदान किया जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद किसानों की आय सुरक्षित रहे।
- छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए विशेष सुरक्षा प्रदान की जाए, जिससे वे वैश्विक मूल्य उतार-चढ़ाव से प्रभावित न हो।
मोर्चा के अध्यक्ष आलम ने मीडिया से कहा, भारत और अमेरिका के इस समझौते से छोटे किसान (बादाम, पिस्ता, दूध-डेयरी, मक्का, कपास, गेंहू व चावल) को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा इस तरह की कोई भी डील अमेरिका के साथ ना कि जाए। जैसा टैरिफ अमेरिका वसूल रहा है वैसा ही टैरिफ अमेरिका पर भी लगाया जाना चाहिए।
मुज़फ्फरनगर व्यूज़ | मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
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