मुजफ्फरनगर- (प्रदूषण का विरोध) जनपद में तिरुपति इंटरप्राइजेज के बाहर प्रदर्शन करने वाले किसानों और ग्रामीणों पर पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बुधवार को किसान मजदूर संगठन के बैनर तले दर्जनों कार्यकर्ता और पदाधिकारी कलेक्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय पहुंचे। संगठन ने दर्ज मुकदमे को ‘फर्जी’ करार देते हुए उसे तुरंत वापस लेने और फैक्ट्री की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों के विरुद्ध मुकदमें दर्ज होने के बाद डीएम कार्यालय पहुँचे किसान संगठन के कार्यकर्ता, मुक़दमे वापस लेने की मांग
”आवाज दबाने के लिए दर्ज किया झूठा मुकदमा”
किसान मजदूर संगठन के युवा जिलाध्यक्ष बिल्लू राणा ने प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि ग्रामीण और किसान अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे थे। लेकिन पुलिस ने किसानों की आवाज को दबाने के उद्देश्य से उन पर झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि यह मुकदमा वापस नहीं लिया गया, तो किसान चुप नहीं बैठेंगे और आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने केवल मुकदमे की वापसी ही नहीं, बल्कि तिरुपति इंटरप्राइजेज की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में मांग की गई है कि- फैक्ट्री द्वारा पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं, इसकी जांच हो। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों की अनदेखी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। फैक्ट्री से स्थानीय ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों का आकलन हो।
जिलाधिकारी कार्यालय पर ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि किसानों और मजदूरों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों के प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, जिलाधिकारी ने उनकी मांगों को सुना है और प्रार्थना पत्र लेकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है।
मुज़फ्फरनगर व्यूज़ | मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
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