मुज़फ्फरनगर- उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले से एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक विवाहिता को अपने हक और न्याय के लिए अपने ही ससुराल के बंद दरवाजे के बाहर बच्चों के साथ धरने पर बैठना पड़ा। ग्राम सुजड़ू की यह घटना अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है।
गरीब पीड़िता के गंभीर आरोप
मूल रूप से ग्राम जड़ौदा निवासी पीड़िता की शादी सुजड़ू में मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार हुई थी। पीड़िता का आरोप है कि शादी के बाद से ही उसे ससुराल पक्ष द्वारा लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। पीड़िता ने बताया कि वह एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है, जिसे आधार बनाकर ससुराल वाले उसे आए दिन ताने देते थे और अपमानित करते थे। जब शारीरिक और मानसिक हिंसा की सारी सीमाएं पार हो गईं, तो बेबस महिला अपने मासूम बच्चों को लेकर ससुराल के मुख्य गेट के सामने धरने पर बैठ गई।
पीड़िता का कहना है कि वह एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है और इसी वजह से ससुराल पक्ष आए दिन अपमानित करते है। आए दिन तानों, मारपीट और अपमान से परेशान होकर महिला शनिवार सुबह से अपने ही ससुराल के मकान के गेट के सामने बैठने को मजबूर हो गई।
एक तरफ जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘मिशन शक्ति’ के जरिए उत्तर प्रदेश में महिलाओं को सुरक्षित और सशक्त बनाने का दावा कर रहे हैं, वहीं सुजड़ू की इस तस्वीर ने जमीनी हकीकत को बयां कर दिया है। पीड़िता का कहना है कि उसने पहले भी कई बार अपनी पीड़ा समाज और परिवार के सामने रखी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। थक-हारकर उसने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि मुज़फ्फरनगर पुलिस इस गंभीर मामले में कितनी सक्रियता दिखाती है और पीड़िता को कब तक न्याय मिलता है।
मुज़फ्फरनगर व्यूज़ | मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
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