मुजफ्फरनगर- केंद्र सरकार द्वारा 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले आम बजट से पहले भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार को घेरते हुए किसानों और ग्रामीणों के लिए ठोस प्रावधानों की मांग की है। जाट कॉलोनी स्थित अपने आवास पर मीडिया से रूबरू होते हुए टिकैत ने कहा कि बजट केवल कागजी आंकड़ों का खेल नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें कृषि और गांव का वास्तविक अक्स दिखना चाहिए।
राकेश टिकैत ने फसलों के दामों और जमीनों के बढ़ते सर्किल रेट के अंतर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि फसलों के दाम वर्षों से स्थिर हैं, जबकि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। MSP पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अब केवल बजट का विषय नहीं बल्कि कानून का मुद्दा बन चुका है। टिकैत ने मांग की कि सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि उपकरणों पर सब्सिडी बढ़ाए। उन्होंने विशेष रूप से ट्रैक्टरों पर टैक्स छूट और बिजली दरों में बड़ी राहत की वकालत की।
सोलर पैनल और फसल बीमा में सुधार की मांग
ऊर्जा बचत का मुद्दा उठाते हुए किसान नेता ने कहा कि सरकार को सोलर पैनल पर सब्सिडी की सीमा बढ़ानी चाहिए। वर्तमान में 3 किलोवाट तक मिल रही सब्सिडी को बढ़ाकर 10 किलोवाट तक किया जाना चाहिए, ताकि उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट के किसान भी इसका लाभ उठा सकें। इसके अलावा, उन्होंने ‘फसल बीमा योजना’ को विफल बताते हुए कहा कि जलभराव से होने वाले नुकसान का किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिल पा रहा है।
टिकैत ने पहाड़ी राज्यों (हिमाचल और उत्तराखंड) के किसानों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सड़कों के निर्माण और परिवहन की समस्याओं के कारण बागवानी किसानों की उपज खराब हो रही है, जिससे पलायन बढ़ रहा है। सरकार को इसे रोकने के लिए ठोस नीति बनानी चाहिए। अंत में उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला, तो किसान एक बार फिर बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
मुज़फ्फरनगर व्यूज़ | मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
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